पटना के विकास भवन में आज खेल विभाग, बिहार द्वारा जिला खेल पदाधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता खेल विभाग के सचिव श्री महेन्द्र कुमार ने की। बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला खेल पदाधिकारी उपस्थित रहे और विभागीय प्राथमिकताओं, जमीनी प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए सचिव ने कहा कि सभी जिलों में संचालित एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्रों का नियमित, गहन और समयबद्ध निरीक्षण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जिला खेल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों के एकलव्य केंद्रों का स्वयं भ्रमण करें और वहां बच्चों की उपस्थिति, आवासीय व्यवस्था, मेस की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तथा केंद्रों के समग्र संचालन की बारीकी से जांच सुनिश्चित करें। सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी जिलों में एकलव्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से पुनः प्रारंभ किया गया है और इनका सुचारु तथा प्रभावी संचालन विभाग की जिम्मेदारी है।
सचिव ने खेल विभाग के प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) को साप्ताहिक रूप से अद्यतन करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला खेल पदाधिकारी को अपने जिले की खेल अवसंरचना—प्रखंड स्तर के आउटडोर स्टेडियम, पंचायत स्तर के खेल मैदान तथा जिला स्तरीय खेल भवन सह व्यायामशाला—का नियमित फील्ड निरीक्षण करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एमआईएस में साप्ताहिक अद्यतन नहीं होता है, तो यह माना जाएगा कि संबंधित सप्ताह में फील्ड विजिट नहीं की गई है, जो स्वीकार्य नहीं होगा। निरीक्षण को कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इसे हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रखंड स्तर के आउटडोर स्टेडियम एवं पंचायत स्तर के खेल मैदानों की जिला-वार सूची शीघ्र ही सभी जिला खेल पदाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी। सचिव ने निर्देश दिया कि इन अवसंरचनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन कर वहां नियमित खेल गतिविधियां प्रारंभ की जाएं, ताकि स्थानीय नागरिकों, युवाओं और उभरते खिलाड़ियों को खेलों से जोड़ा जा सके और जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूती मिले।
जिला स्तर पर उपलब्ध खेल अवसंरचना और उपकरणों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सचिव ने जिला खेल पदाधिकारियों को स्थानीय खेल संघों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय खेल संघों को नाममात्र के न्यूनतम शुल्क पर अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए जिला स्तरीय खेल अवसंरचना के उपयोग हेतु प्रोत्साहित किया जाए। यही व्यवस्था खेल भवनों में संचालित व्यायामशालाओं पर भी लागू होगी। सचिव ने स्पष्ट किया कि बुनियादी उपयोग शुल्क से जहां एक ओर खेल अवसंरचना के रखरखाव में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर संसाधनों के अनुशासित, जिम्मेदार और सतत उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक के अंत में सचिव ने सभी जिला खेल पदाधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे खेल विभाग की योजनाओं और अवसंरचनाओं को सक्रिय रूप से धरातल पर उतारते हुए खिलाड़ियों और युवाओं के हित में कार्य करें, ताकि राज्य में खेल गतिविधियों को नई गति और दिशा मिल सके।
