आईसीएआर चयन प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार पारदर्शिता और योग्यता आधारित नया मानक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिक चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव लागू किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आईसीएआर ने अपने चयन ढांचे में व्यापक और संरचनात्मक सुधार करते हुए एक नया मानक स्थापित किया है, जो अवसर की समानता, पद की प्रासंगिकता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को केंद्र में रखता है।

महानिदेशक आईसीएआर मांगी लाल जाट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान को सशक्त बनाने की स्पष्ट सोच के अनुरूप यह नया चयन ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली पारदर्शिता, योग्यता और भूमिका की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती है।

जुलाई 2025 में गठित उच्चस्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर वेद प्रकाश ने की थी, ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति की सिफारिशों को अब औपचारिक रूप से लागू किया जा रहा है, जिससे चयन प्रक्रिया में गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। समिति में प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों और चयन विशेषज्ञों ने भाग लिया था।

नए ढांचे के तहत चयन प्रक्रिया में वैचारिक बदलाव करते हुए पद केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसका अर्थ है कि चयन व्यक्ति के बजाय पद की आवश्यकताओं के अनुरूप योग्यता, अनुभव और प्रासंगिक दक्षताओं के आधार पर किया जाएगा। यह बदलाव आईसीएआर में सर्वोत्तम प्रतिभा को उपयुक्त भूमिकाओं में नियुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

चयन में वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करने के लिए स्कोरकार्ड और साक्षात्कार के बीच स्पष्ट और वैज्ञानिक अनुपात निर्धारित किया गया है। अनुसंधान प्रबंधन पदों के लिए यह अनुपात 70:30, गैर अनुसंधान प्रबंधन पदों के लिए 75:25 और प्रधान तथा वरिष्ठ वैज्ञानिकों के लिए 80:20 रखा गया है। यह व्यवस्था चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मापनीय बनाती है।

नई प्रणाली में शोध के प्रभाव का आकलन करने के लिए केवल प्रकाशनों की संख्या के बजाय एच इंडेक्स को प्रमुख मानदंड बनाया गया है। इसके साथ ही नेतृत्व क्षमता और प्रबंधन कौशल को भी चयन के महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया गया है, ताकि वैज्ञानिक उत्कृष्टता के साथ प्रशासनिक दक्षता भी सुनिश्चित हो सके।

दुर्गम और कठिन क्षेत्रों में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को विशेष वेटेज देने का प्रावधान भी किया गया है। महानिदेशक जाट ने कहा कि यह कदम उन वैज्ञानिकों के समर्पण और सेवा के प्रति सरकार की कृतज्ञता को दर्शाता है, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सेवा की है।

नए चयन ढांचे के तहत प्रवासी भारतीय वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों की प्रतिभाओं के लिए भी अवसरों को अधिक खुला और सुलभ बनाया गया है। चयन के सभी चरण योग्यता आधारित और पूर्णतः पारदर्शी होंगे, जिससे वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सकेगा।

प्रक्रिया को और अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए मनोमितीय मूल्यांकन और साक्षात्कारकर्ताओं के लिए विशेष ओरिएंटेशन जैसे नए आयाम जोड़े गए हैं। इससे चयन में मानवीय पक्षों का संतुलित आकलन संभव होगा और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

नई नीति में किसान केंद्रित और उद्योग उन्मुख शोध को प्राथमिकता दी गई है। बहुविषयक अनुसंधान, स्टार्टअप्स और उद्योग के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर कृषि अनुसंधान के लाभ सीधे किसानों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

महानिदेशक जाट ने कहा कि यह सुधार केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि आईसीएआर की संपूर्ण कार्यसंस्कृति में परिवर्तन की शुरुआत है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक वैज्ञानिक अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप शोध, शिक्षण या विस्तार के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिशा निर्देशों के अनुरूप, ये सुधार आईसीएआर को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार करते हैं। प्रोफेसर वेद प्रकाश समिति की सिफारिशों के साथ लागू किया गया यह नया चयन ढांचा भारतीय कृषि अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।

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